श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 134: विदुलाका अपने पुत्रको युद्धके लिये उत्साहित करना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  5.134.29 
स्वर्गद्वारोपमं राज्यमथवाप्यमृतोपमम्।
युद्धमेकायनं मत्वा पतोल्मुक इवारिषु॥ २९॥
 
 
अनुवाद
स्वर्ग के द्वारों के समान स्वर्ग तक पहुँचने या अमृत के समान राज्य प्राप्त करने के लिए युद्ध को ही एकमात्र मार्ग मानकर आप जलती हुई लकड़ी के समान शत्रुओं पर टूट पड़े॥29॥
 
Considering war as the only way to reach heaven like the gates of heaven or attain kingdom like nectar, you pounced on your enemies like a burning stick. 29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)