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mahabharat 5.134.22-23h: यदि तुम जीवन के प्रति अत्यधिक आसक्त नहीं हो, तो तुम अपने सभी शत्रुओं को परास्त कर सकते हो। किन्तु यदि तुम निराश और हतोत्साहित हो तथा ऐसा कायरतापूर्ण रवैया अपना रहे हो, तो तुम्हें इस पापमय आजीविका को त्याग देना चाहिए ॥22 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 5.134: विदुलाका अपने पुत्रको युद्धके लिये उत्साहित करना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 134: विदुलाका अपने पुत्रको युद्धके लिये उत्साहित करना  »  श्लोक 22-23h
 
 
श्लोक  5.134.22-23h 
सर्वे ते शत्रव: शक्या न चेज्जीवितुमिच्छसि।
अथ चेदीदृशीं वृत्तिं क्लीबामभ्युपपद्यसे॥ २२॥
निर्विण्णात्मा हतमना मुञ्चैतां पापजीविकाम्।
 
 
अनुवाद
यदि तुम जीवन के प्रति अत्यधिक आसक्त नहीं हो, तो तुम अपने सभी शत्रुओं को परास्त कर सकते हो। किन्तु यदि तुम निराश और हतोत्साहित हो तथा ऐसा कायरतापूर्ण रवैया अपना रहे हो, तो तुम्हें इस पापमय आजीविका को त्याग देना चाहिए ॥22 1/2॥
 
If you are not too attached to life, you can defeat all your enemies. But if you are dejected and discouraged and are adopting such a cowardly attitude, then you should give up this sinful livelihood. ॥22 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)