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mahabharat 5.134.14: मैं उच्च कुल में उत्पन्न होकर एक सरोवर से दूसरे सरोवर में हंसी की तरह आई और इस राज्य की स्वामिनी, समस्त शुभ साधनों से संपन्न तथा अपने पति से परम आदर की पात्र हुई ॥14॥   |   mahabharat अध्याय 5.134: विदुलाका अपने पुत्रको युद्धके लिये उत्साहित करना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 134: विदुलाका अपने पुत्रको युद्धके लिये उत्साहित करना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  5.134.14 
अहं महाकुले जाता ह्रदाद्‍ध्रदमिवागता।
ईश्वरी सर्वकल्याणी भर्त्रा परमपूजिता॥ १४॥
 
 
अनुवाद
मैं उच्च कुल में उत्पन्न होकर एक सरोवर से दूसरे सरोवर में हंसी की तरह आई और इस राज्य की स्वामिनी, समस्त शुभ साधनों से संपन्न तथा अपने पति से परम आदर की पात्र हुई ॥14॥
 
Born in a high family, I came like a laughter from one lake to another and became the mistress of this kingdom, blessed with all the auspicious means and worthy of the utmost respect from my husband. ॥14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)