श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 134: विदुलाका अपने पुत्रको युद्धके लिये उत्साहित करना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  5.134.11 
समृद्धिरसमृद्धिर्वा पूर्वेषां मम संजय।
एवं विद्वान् युद्धमना भव मा प्रत्युपाहर॥ ११॥
 
 
अनुवाद
संजय! युद्ध से हमें या मेरे पूर्वजों को कोई लाभ हो या हानि, युद्ध करना क्षत्रिय का कर्तव्य है। ऐसा जानकर, उसी पर ध्यान लगाओ और युद्ध बंद मत करो।
 
Sanjaya! Whether the war brings any benefit or harm to us or to my ancestors, fighting is the duty of a Kshatriya. Knowing this, concentrate on it and do not stop the war.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)