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mahabharat 5.133.7: अपने को दुर्बल समझकर अपनी उपेक्षा मत करो, इस आत्मा को अल्प धन से मत भरो, मन को अत्यंत शुभ बनाकर शुभ विचारों से भर दो, निर्भय बनो, भय का सर्वथा त्याग करो ॥7॥   |   mahabharat अध्याय 5.133: कुन्तीके द्वारा विदुलोपाख्यानका आरम्भ, विदुलाका रणभूमिसे भागकर आये हुए अपने पुत्रको कड़ी फटकार देकर पुन: युद्धके लिये उत्साहित करना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 133: कुन्तीके द्वारा विदुलोपाख्यानका आरम्भ, विदुलाका रणभूमिसे भागकर आये हुए अपने पुत्रको कड़ी फटकार देकर पुन: युद्धके लिये उत्साहित करना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  5.133.7 
माऽऽत्मानमवमन्यस्व मैनमल्पेन बीभर:।
मन: कृत्वा सुकल्याणं मा भैस्त्वं प्रतिसंहर॥ ७॥
 
 
अनुवाद
अपने को दुर्बल समझकर अपनी उपेक्षा मत करो, इस आत्मा को अल्प धन से मत भरो, मन को अत्यंत शुभ बनाकर शुभ विचारों से भर दो, निर्भय बनो, भय का सर्वथा त्याग करो ॥7॥
 
Don't neglect yourself by considering yourself weak, don't feed this soul with little wealth, make the mind extremely auspicious and fill it with good thoughts, become fearless, abandon fear completely. ॥ 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)