Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.133.44: जैसे इन्द्र के पराक्रम से सभी देवता सुखी रहते हैं, उसी प्रकार जिसके बल और पुरुषार्थ से उसके बंधु-बांधव सुखपूर्वक रहते हैं, उस वीर पुरुष का जीवन इस संसार में सर्वश्रेष्ठ है ॥ 44॥ | mahabharat अध्याय 5.133: कुन्तीके द्वारा विदुलोपाख्यानका आरम्भ, विदुलाका रणभूमिसे भागकर आये हुए अपने पुत्रको कड़ी फटकार देकर पुन: युद्धके लिये उत्साहित करना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जैसे इन्द्र के पराक्रम से सभी देवता सुखी रहते हैं, उसी प्रकार जिसके बल और पुरुषार्थ से उसके बंधु-बांधव सुखपूर्वक रहते हैं, उस वीर पुरुष का जीवन इस संसार में सर्वश्रेष्ठ है ॥ 44॥
Just as all the gods remain happy due to the prowess of Indra, similarly the life of a valiant man whose strength and efforts make his brothers and relatives prosper happily is the best in this world. ॥ 44॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥