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mahabharat 5.133.41: संजय! जो दरिद्र और दुर्बल मनुष्य दास-दासियों से रहित हैं और दूसरों का अन्न खाकर जीवन निर्वाह करते हैं, उनके व्यवसाय का तुम अनुसरण मत करो ॥ 41॥   |   mahabharat अध्याय 5.133: कुन्तीके द्वारा विदुलोपाख्यानका आरम्भ, विदुलाका रणभूमिसे भागकर आये हुए अपने पुत्रको कड़ी फटकार देकर पुन: युद्धके लिये उत्साहित करना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 133: कुन्तीके द्वारा विदुलोपाख्यानका आरम्भ, विदुलाका रणभूमिसे भागकर आये हुए अपने पुत्रको कड़ी फटकार देकर पुन: युद्धके लिये उत्साहित करना  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  5.133.41 
भृत्यैर्विहीयमानानां परपिण्डोपजीविनाम्।
कृपणानामसत्त्वानां मा वृत्तिमनुवर्तिथा:॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
संजय! जो दरिद्र और दुर्बल मनुष्य दास-दासियों से रहित हैं और दूसरों का अन्न खाकर जीवन निर्वाह करते हैं, उनके व्यवसाय का तुम अनुसरण मत करो ॥ 41॥
 
Sanjay! Do not follow the profession of the poor and weak people who are without servants and live on the food of others. ॥ 41॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)