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mahabharat 5.133.40: विदुला ने कहा, "बेटा, आज हम भोजन में क्या खाएँगे? जो दरिद्र ऐसी बातों के लिए चिन्तित रहते हैं, उनके लोक हमारे शत्रुओं को मिलें और हमारे हितैषी मित्र उन पुण्यात्मा पुरुषों के लोक में आएँ, जिनका सर्वत्र सम्मान होता है।"   |   mahabharat अध्याय 5.133: कुन्तीके द्वारा विदुलोपाख्यानका आरम्भ, विदुलाका रणभूमिसे भागकर आये हुए अपने पुत्रको कड़ी फटकार देकर पुन: युद्धके लिये उत्साहित करना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 133: कुन्तीके द्वारा विदुलोपाख्यानका आरम्भ, विदुलाका रणभूमिसे भागकर आये हुए अपने पुत्रको कड़ी फटकार देकर पुन: युद्धके लिये उत्साहित करना  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  5.133.40 
मातोवाच
किमद्यकानां ये लोका द्विषन्तस्तानवाप्नुयु:।
ये त्वादृतात्मनां लोका: सुहृदस्तान् व्रजन्तु न:॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
विदुला ने कहा, "बेटा, आज हम भोजन में क्या खाएँगे? जो दरिद्र ऐसी बातों के लिए चिन्तित रहते हैं, उनके लोक हमारे शत्रुओं को मिलें और हमारे हितैषी मित्र उन पुण्यात्मा पुरुषों के लोक में आएँ, जिनका सर्वत्र सम्मान होता है।"
 
Vidula said, "Son, what will we have for dinner today? May the worlds of the poor who are worried about such things be given to our enemies, and may our well-wishing friends come to the worlds of the virtuous men who are respected everywhere." 40.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)