Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 5.133.37-38: जो अपने प्रियतम और सुखों को त्यागकर धन की खोज करता है, वह शीघ्र ही अपने मंत्रियों के आनन्द को बढ़ा देता है। 37-38।   |   mahabharat अध्याय 5.133: कुन्तीके द्वारा विदुलोपाख्यानका आरम्भ, विदुलाका रणभूमिसे भागकर आये हुए अपने पुत्रको कड़ी फटकार देकर पुन: युद्धके लिये उत्साहित करना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 133: कुन्तीके द्वारा विदुलोपाख्यानका आरम्भ, विदुलाका रणभूमिसे भागकर आये हुए अपने पुत्रको कड़ी फटकार देकर पुन: युद्धके लिये उत्साहित करना  »  श्लोक 37-38
 
 
श्लोक  5.133.37-38 
य आत्मन: प्रियसुखे हित्वा मृगयते श्रियम्॥ ३७॥
अमात्यानामथो हर्षमादधात्यचिरेण स:॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
जो अपने प्रियतम और सुखों को त्यागकर धन की खोज करता है, वह शीघ्र ही अपने मंत्रियों के आनन्द को बढ़ा देता है। 37-38।
 
He who abandons his beloved and pleasures and seeks wealth soon increases the joy of his ministers. 37-38.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)