Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.133.32-33h: जो क्षत्रिय अपने हृदय में द्वेष रखता है और अपने शत्रुओं को क्षमा नहीं करता, वह इन गुणों के कारण पुरुष कहलाता है। जो क्षमाशील और द्वेष से रहित क्षत्रिय है, वह न तो स्त्री है और न ही पुरुष। 32 1/2 | mahabharat अध्याय 5.133: कुन्तीके द्वारा विदुलोपाख्यानका आरम्भ, विदुलाका रणभूमिसे भागकर आये हुए अपने पुत्रको कड़ी फटकार देकर पुन: युद्धके लिये उत्साहित करना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एतावानेव पुरुषो यदमर्षी यदक्षमी॥ ३२॥
क्षमावान् निरमर्षश्च नैव स्त्री न पुन: पुमान्।
अनुवाद
जो क्षत्रिय अपने हृदय में द्वेष रखता है और अपने शत्रुओं को क्षमा नहीं करता, वह इन गुणों के कारण पुरुष कहलाता है। जो क्षमाशील और द्वेष से रहित क्षत्रिय है, वह न तो स्त्री है और न ही पुरुष। 32 1/2
A Kshatriya who has resentment in his heart and who does not forgive his enemies is called a man because of these qualities. A Kshatriya who is forgiving and devoid of resentment is neither a woman nor a man. 32 1/2
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥