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mahabharat 5.133.24-25h: जो मनुष्य शास्त्रज्ञान, तप, धन या पराक्रम से दूसरों को परास्त करता है, वह उस श्रेष्ठ कर्म से पुरुष कहलाता है।   |   mahabharat अध्याय 5.133: कुन्तीके द्वारा विदुलोपाख्यानका आरम्भ, विदुलाका रणभूमिसे भागकर आये हुए अपने पुत्रको कड़ी फटकार देकर पुन: युद्धके लिये उत्साहित करना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 133: कुन्तीके द्वारा विदुलोपाख्यानका आरम्भ, विदुलाका रणभूमिसे भागकर आये हुए अपने पुत्रको कड़ी फटकार देकर पुन: युद्धके लिये उत्साहित करना  »  श्लोक 24-25h
 
 
श्लोक  5.133.24-25h 
श्रुतेन तपसा वापि श्रिया वा विक्रमेण वा॥ २४॥
जनान् योऽभिभवत्यन्यान् कर्मणा हि स वै पुमान्।
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य शास्त्रज्ञान, तप, धन या पराक्रम से दूसरों को परास्त करता है, वह उस श्रेष्ठ कर्म से पुरुष कहलाता है।
 
He who defeats others by his knowledge of scriptures, austerity, wealth or valour is called a man by that noble deed. 24 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)