Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.133.20-21h: मनुष्य को अपने शत्रु का पैर डूबते या ऊँचाई से गिरते समय भी पकड़ कर रखना चाहिए। और यदि ऐसा करते समय वह उखड़ भी जाए, तो भी उसे दुःख नहीं होना चाहिए। अच्छी नस्ल के घोड़े न थकते हैं, न कमज़ोर पड़ते हैं। उनके इस कार्य को स्मरण करते हुए, उस पर रखे युद्ध आदि का भार तत्परता से उठाना चाहिए। | mahabharat अध्याय 5.133: कुन्तीके द्वारा विदुलोपाख्यानका आरम्भ, विदुलाका रणभूमिसे भागकर आये हुए अपने पुत्रको कड़ी फटकार देकर पुन: युद्धके लिये उत्साहित करना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मनुष्य को अपने शत्रु का पैर डूबते या ऊँचाई से गिरते समय भी पकड़ कर रखना चाहिए। और यदि ऐसा करते समय वह उखड़ भी जाए, तो भी उसे दुःख नहीं होना चाहिए। अच्छी नस्ल के घोड़े न थकते हैं, न कमज़ोर पड़ते हैं। उनके इस कार्य को स्मरण करते हुए, उस पर रखे युद्ध आदि का भार तत्परता से उठाना चाहिए।
A man must hold the leg of his enemy even when drowning or falling from a height. And even if he is uprooted while doing so, he should not feel sad. Horses of a good breed neither get tired nor become weak. Remembering this act of theirs, one should diligently carry the burden of war etc. placed on him.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥