Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.133.17: विद्वान पुरुष को मनचाहा फल मिले या न मिले, इसका शोक नहीं होता। वह अपनी पूरी शक्ति के अनुसार अन्तिम श्वास तक निरन्तर प्रयत्न करता रहता है और अपने लिए धन की इच्छा नहीं करता।॥17॥ | mahabharat अध्याय 5.133: कुन्तीके द्वारा विदुलोपाख्यानका आरम्भ, विदुलाका रणभूमिसे भागकर आये हुए अपने पुत्रको कड़ी फटकार देकर पुन: युद्धके लिये उत्साहित करना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अलब्ध्वा यदि वा लब्ध्वा नानुशोचति पण्डित:।
आनन्तर्यं चारभते न प्राणानां धनायते॥ १७॥
अनुवाद
विद्वान पुरुष को मनचाहा फल मिले या न मिले, इसका शोक नहीं होता। वह अपनी पूरी शक्ति के अनुसार अन्तिम श्वास तक निरन्तर प्रयत्न करता रहता है और अपने लिए धन की इच्छा नहीं करता।॥17॥
A learned man does not grieve whether he gets the desired result or not. He strives continuously (according to his full strength) till his last breath and does not desire wealth for himself.॥ 17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥