Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.133.14: तू क्षण-दो क्षण के लिए तिन्दुक (एक प्रकार की लकड़ी) की तरह जल उठ (शत्रु के सामने महान पराक्रम का प्रदर्शन कर, चाहे वह थोड़े समय के लिए ही क्यों न हो); परंतु जीने की इच्छा से तू भूसी की ज्वालारहित अग्नि के समान धुआँ मात्र मत बन (क्षीण पराक्रम का प्रयोग न कर)॥14॥ | mahabharat अध्याय 5.133: कुन्तीके द्वारा विदुलोपाख्यानका आरम्भ, विदुलाका रणभूमिसे भागकर आये हुए अपने पुत्रको कड़ी फटकार देकर पुन: युद्धके लिये उत्साहित करना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अलातं तिन्दुकस्येव मुहूर्तमपि विज्वल।
मा तुषाग्निरिवानर्चिर्धूमायस्व जिजीविषु:॥ १४॥
अनुवाद
तू क्षण-दो क्षण के लिए तिन्दुक (एक प्रकार की लकड़ी) की तरह जल उठ (शत्रु के सामने महान पराक्रम का प्रदर्शन कर, चाहे वह थोड़े समय के लिए ही क्यों न हो); परंतु जीने की इच्छा से तू भूसी की ज्वालारहित अग्नि के समान धुआँ मात्र मत बन (क्षीण पराक्रम का प्रयोग न कर)॥14॥
You should blaze up like a burning wood of a tinduk (a kind of wood) for a moment or two (display great valour before the enemy, even if it is for a short while); but do not, in your desire to live, become mere smoke like a flameless fire made of husk (do not use feeble valour).॥14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥