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mahabharat 5.133.13: दीन और दरिद्र मत बनो। अपने वीरतापूर्ण कार्यों से यश प्राप्त करो। साधारण, तुच्छ या हीन भावना का आश्रय मत लो, बल्कि सिंह की गर्जना के साथ युद्धभूमि में डटे रहो। 13॥   |   mahabharat अध्याय 5.133: कुन्तीके द्वारा विदुलोपाख्यानका आरम्भ, विदुलाका रणभूमिसे भागकर आये हुए अपने पुत्रको कड़ी फटकार देकर पुन: युद्धके लिये उत्साहित करना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 133: कुन्तीके द्वारा विदुलोपाख्यानका आरम्भ, विदुलाका रणभूमिसे भागकर आये हुए अपने पुत्रको कड़ी फटकार देकर पुन: युद्धके लिये उत्साहित करना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  5.133.13 
मास्तं गमस्त्वं कृपणो विश्रूयस्व स्वकर्मणा।
मा मध्ये मा जघन्ये त्वं माधो भूस्तिष्ठ गर्जित:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
दीन और दरिद्र मत बनो। अपने वीरतापूर्ण कार्यों से यश प्राप्त करो। साधारण, तुच्छ या हीन भावना का आश्रय मत लो, बल्कि सिंह की गर्जना के साथ युद्धभूमि में डटे रहो। 13॥
 
Don't become humble and become destitute. Gain fame through your brave deeds. Do not take refuge in mediocre, lowly or inferior sentiments, rather stand firm in the battlefield with the roar of a lion. 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)