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mahabharat 5.133.12: कायर! तू यहाँ बिजली से मारे हुए शव के समान निश्चल क्यों पड़ा है? उठ, शत्रुओं से पराजित होकर यहाँ मत पड़ा रह ॥12॥   |   mahabharat अध्याय 5.133: कुन्तीके द्वारा विदुलोपाख्यानका आरम्भ, विदुलाका रणभूमिसे भागकर आये हुए अपने पुत्रको कड़ी फटकार देकर पुन: युद्धके लिये उत्साहित करना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 133: कुन्तीके द्वारा विदुलोपाख्यानका आरम्भ, विदुलाका रणभूमिसे भागकर आये हुए अपने पुत्रको कड़ी फटकार देकर पुन: युद्धके लिये उत्साहित करना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  5.133.12 
त्वमेवं प्रेतवच्छेषे कस्माद् वज्रहतो यथा।
उत्तिष्ठ हे कापुरुष मा स्वाप्सी: शत्रुनिर्जित:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
कायर! तू यहाँ बिजली से मारे हुए शव के समान निश्चल क्यों पड़ा है? उठ, शत्रुओं से पराजित होकर यहाँ मत पड़ा रह ॥12॥
 
Coward! Why are you lying here motionless like a dead body struck by lightning? Just get up, don't lie here defeated by the enemies. ॥12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)