Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 5.133.11: आकाश में निर्भय होकर उड़ने वाले बाज पक्षी की तरह आप रणभूमि में निर्भय होकर विचरण करते रहें और गर्जना करके अथवा मौन रहकर शत्रु के छिद्रों को देखते रहें। 11॥   |   mahabharat अध्याय 5.133: कुन्तीके द्वारा विदुलोपाख्यानका आरम्भ, विदुलाका रणभूमिसे भागकर आये हुए अपने पुत्रको कड़ी फटकार देकर पुन: युद्धके लिये उत्साहित करना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 133: कुन्तीके द्वारा विदुलोपाख्यानका आरम्भ, विदुलाका रणभूमिसे भागकर आये हुए अपने पुत्रको कड़ी फटकार देकर पुन: युद्धके लिये उत्साहित करना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  5.133.11 
अप्यरे: श्येनवच्छिद्रं पश्येस्त्वं विपरिक्रमन्।
विनदन् वाथवा तूष्णीं व्योम्नि वापरिशङ्कित:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
आकाश में निर्भय होकर उड़ने वाले बाज पक्षी की तरह आप रणभूमि में निर्भय होकर विचरण करते रहें और गर्जना करके अथवा मौन रहकर शत्रु के छिद्रों को देखते रहें। 11॥
 
Like the eagle bird that flies fearlessly in the sky, you roam fearlessly in the battlefield and keep looking at the holes of the enemy by roaring or by remaining silent. 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)