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mahabharat 5.133.10: शत्रु रूपी सर्प के दांत तोड़ दो और तुरंत मर जाओ। भले ही तुम्हें अपने प्राण गँवाने का संदेह हो, फिर भी शत्रु के विरुद्ध युद्ध में अपना पराक्रम दिखाओ।   |   mahabharat अध्याय 5.133: कुन्तीके द्वारा विदुलोपाख्यानका आरम्भ, विदुलाका रणभूमिसे भागकर आये हुए अपने पुत्रको कड़ी फटकार देकर पुन: युद्धके लिये उत्साहित करना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 133: कुन्तीके द्वारा विदुलोपाख्यानका आरम्भ, विदुलाका रणभूमिसे भागकर आये हुए अपने पुत्रको कड़ी फटकार देकर पुन: युद्धके लिये उत्साहित करना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  5.133.10 
अप्यहेरारुजन् दंष्ट्रामाश्वेव निधनं व्रज।
अपि वा संशयं प्राप्य जीवितेऽपि पराक्रमे:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
शत्रु रूपी सर्प के दांत तोड़ दो और तुरंत मर जाओ। भले ही तुम्हें अपने प्राण गँवाने का संदेह हो, फिर भी शत्रु के विरुद्ध युद्ध में अपना पराक्रम दिखाओ।
 
Break the teeth of the serpent of the enemy and die instantly. Even if you are in doubt about losing your life, display your valour in the battle against the enemy.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)