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mahabharat 5.131.6-7: समस्त लोकपाल उनकी भुजाओं में स्थित हो गए। मुख से अग्नि की ज्वालाएँ निकलने लगीं। आदित्य, साध्य, वसु, दोनों अश्विनीकुमार, मरुद्गणों सहित इन्द्र, विश्वेदेव, यक्ष, गन्धर्व, नाग और राक्षस भी अपने-अपने भिन्न-भिन्न भागों में प्रकट हो गए।   |   mahabharat अध्याय 5.131: भगवान‍् श्रीकृष्णका विश्वरूप दर्शन कराकर कौरवसभासे प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 131: भगवान‍् श्रीकृष्णका विश्वरूप दर्शन कराकर कौरवसभासे प्रस्थान  »  श्लोक 6-7
 
 
श्लोक  5.131.6-7 
लोकपाला भुजेष्वासन्नग्निरास्यादजायत।
आदित्याश्चैव साध्याश्च वसवोऽथाश्विनावपि॥ ६॥
मरुतश्च सहेन्द्रेण विश्वेदेवास्तथैव च।
बभूवुश्चैव यक्षाश्च गन्धर्वोरगराक्षसा:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
समस्त लोकपाल उनकी भुजाओं में स्थित हो गए। मुख से अग्नि की ज्वालाएँ निकलने लगीं। आदित्य, साध्य, वसु, दोनों अश्विनीकुमार, मरुद्गणों सहित इन्द्र, विश्वेदेव, यक्ष, गन्धर्व, नाग और राक्षस भी अपने-अपने भिन्न-भिन्न भागों में प्रकट हो गए।
 
All the Lokpals were situated in his arms. Flames of fire started coming out of the mouth. Aditya, Sadhya, Vasu, both Ashwinikumars, Indra along with Marudgan, Vishvedev, Yaksha, Gandharva, Naga and Rakshas also appeared in their different parts. 6-7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)