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mahabharat 5.131.35: माधव! मैं हर प्रकार से शांति स्थापित करने का प्रयत्न कर रहा हूँ, ये सब कौरव तथा बाहर से आये हुए राजा भी यह जानते हैं॥35॥   |   mahabharat अध्याय 5.131: भगवान‍् श्रीकृष्णका विश्वरूप दर्शन कराकर कौरवसभासे प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 131: भगवान‍् श्रीकृष्णका विश्वरूप दर्शन कराकर कौरवसभासे प्रस्थान  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  5.131.35 
जानन्ति कुरव: सर्वे राजानश्चैव पार्थिवा:।
शमे प्रयतमानं मां सर्वयत्नेन माधव॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
माधव! मैं हर प्रकार से शांति स्थापित करने का प्रयत्न कर रहा हूँ, ये सब कौरव तथा बाहर से आये हुए राजा भी यह जानते हैं॥35॥
 
Madhav! I am trying to establish peace by all means, all these Kauravas and the kings who have come from outside also know this. 35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)