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श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 131: भगवान‍् श्रीकृष्णका विश्वरूप दर्शन कराकर कौरवसभासे प्रस्थान  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  5.131.24 
तत: सात्यकिमादाय पाणौ हार्दिक्यमेव च।
ऋषिभिस्तैरनुज्ञातो निर्ययौ मधुसूदन:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् मधुसूदन ने ऋषियों से अनुमति लेकर सात्यकि और कृतवर्मा का हाथ पकड़कर सभाभवन से प्रस्थान किया।
 
After that, Madhusudan took permission from the sages and left the assembly hall holding the hand of Satyaki and Kritavarma.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)