Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.131.20: महाराज जनमेजय! वहाँ एक अद्भुत बात हुई कि धृतराष्ट्र ने भी भगवान श्रीकृष्ण के विराट रूप को देखने की इच्छा से उनसे दो नेत्र प्राप्त कर लिए। | mahabharat अध्याय 5.131: भगवान् श्रीकृष्णका विश्वरूप दर्शन कराकर कौरवसभासे प्रस्थान । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तत्राद्भुतं महाराज धृतराष्ट्रश्च चक्षुषी।
लब्धवान् वासुदेवाच्च विश्वरूपदिदृक्षया॥ २०॥
अनुवाद
महाराज जनमेजय! वहाँ एक अद्भुत बात हुई कि धृतराष्ट्र ने भी भगवान श्रीकृष्ण के विराट रूप को देखने की इच्छा से उनसे दो नेत्र प्राप्त कर लिए।
Maharaja Janamejaya! There a wonderful thing happened that Dhritarashtra also obtained two eyes from Lord Krishna out of the desire to see His cosmic form.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥