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mahabharat 5.131.17: उस समय धृतराष्ट्र बोले - कमलनेत्र! यदुवंश के रक्षक भगवान श्रीकृष्ण! आप सम्पूर्ण जगत के हितैषी हैं, अतः मुझ पर भी कृपा कीजिए॥ 17॥   |   mahabharat अध्याय 5.131: भगवान‍् श्रीकृष्णका विश्वरूप दर्शन कराकर कौरवसभासे प्रस्थान   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 131: भगवान‍् श्रीकृष्णका विश्वरूप दर्शन कराकर कौरवसभासे प्रस्थान  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  5.131.17 
धृतराष्ट्र उवाच
त्वमेव पुण्डरीकाक्ष सर्वस्य जगतो हित:।
तस्मात् त्वं यादवश्रेष्ठ प्रसादं कर्तुमर्हसि॥ १७॥
 
 
अनुवाद
उस समय धृतराष्ट्र बोले - कमलनेत्र! यदुवंश के रक्षक भगवान श्रीकृष्ण! आप सम्पूर्ण जगत के हितैषी हैं, अतः मुझ पर भी कृपा कीजिए॥ 17॥
 
At that time Dhritarashtra said - Lotus-eyed! Lord Krishna, the protector of the Yadu clan! You are the well-wisher of the whole world, so please be kind to me also.॥ 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)