Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.130.52: इन भगवान गोविन्द का पराक्रम, जो अपनी महिमा को कभी नहीं खोते, भयानक है। तुम उन्हें अच्छी तरह नहीं जानते। वे क्रोध में भरे हुए विषधर सर्प के समान भयानक हैं। वे पुण्यात्माओं द्वारा स्तुति किए जाते हैं और तेज के स्वरूप हैं। ॥ 52॥ | mahabharat अध्याय 5.130: दुर्योधनके षड्यन्त्रका सात्यकिद्वारा भंडाफोड़, श्रीकृष्णकी सिंहगर्जना तथा धृतराष्ट्र और विदुरका दुर्योधनको पुन: समझाना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तं न बुद्धॺसि गोविन्दं घोरविक्रममच्युतम्।
आशीविषमिव क्रुद्धं तेजोराशिमनिन्दितम्॥ ५२॥
अनुवाद
इन भगवान गोविन्द का पराक्रम, जो अपनी महिमा को कभी नहीं खोते, भयानक है। तुम उन्हें अच्छी तरह नहीं जानते। वे क्रोध में भरे हुए विषधर सर्प के समान भयानक हैं। वे पुण्यात्माओं द्वारा स्तुति किए जाते हैं और तेज के स्वरूप हैं। ॥ 52॥
The might of this Lord Govinda, who never loses his glory, is terrifying. You do not know him well. He is as terrifying as a poisonous snake filled with anger. He is praised by the virtuous and is the embodiment of brilliance. ॥ 52॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥