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mahabharat 5.130.42: उसने सब प्रकार के पराक्रम करके श्रीकृष्ण को पकड़ने का प्रयत्न किया, परन्तु वह उन्हें कभी पकड़ न सका। उसी श्रीकृष्ण को तू बलपूर्वक अपने वश में करना चाहता है!॥ 42॥   |   mahabharat अध्याय 5.130: दुर्योधनके षड्यन्त्रका सात्यकिद्वारा भंडाफोड़, श्रीकृष्णकी सिंहगर्जना तथा धृतराष्ट्र और विदुरका दुर्योधनको पुन: समझाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.130.42 
ग्रहीतुकामो विक्रम्य सर्वयत्नेन माधवम्।
ग्रहीतुं नाशकच्चैनं तं त्वं प्रार्थयसे बलात्॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
उसने सब प्रकार के पराक्रम करके श्रीकृष्ण को पकड़ने का प्रयत्न किया, परन्तु वह उन्हें कभी पकड़ न सका। उसी श्रीकृष्ण को तू बलपूर्वक अपने वश में करना चाहता है!॥ 42॥
 
He tried to capture Shri Krishna by using all means of bravery, but he could never capture him. You want to bring that same Shri Krishna under your control by force!॥ 42॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)