Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 5.130.36: मैं सुनता हूँ कि आप अपने पापी सहायकों के साथ मिलकर इस अभागे और अजेय वीर कमलनयन श्रीकृष्ण को बन्दी बनाना चाहते हैं ॥36॥   |   mahabharat अध्याय 5.130: दुर्योधनके षड्यन्त्रका सात्यकिद्वारा भंडाफोड़, श्रीकृष्णकी सिंहगर्जना तथा धृतराष्ट्र और विदुरका दुर्योधनको पुन: समझाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 130: दुर्योधनके षड्यन्त्रका सात्यकिद्वारा भंडाफोड़, श्रीकृष्णकी सिंहगर्जना तथा धृतराष्ट्र और विदुरका दुर्योधनको पुन: समझाना  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  5.130.36 
त्वमिमं पुण्डरीकाक्षमप्रधृष्यं दुरासदम्।
पापै: सहायै: संहत्य निग्रहीतुं किलेच्छसि॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
मैं सुनता हूँ कि आप अपने पापी सहायकों के साथ मिलकर इस अभागे और अजेय वीर कमलनयन श्रीकृष्ण को बन्दी बनाना चाहते हैं ॥36॥
 
I hear that you, along with your sinful helpers, want to imprison this wretched and invincible brave Kamalanayan Shri Krishna. 36॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)