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mahabharat 5.130.30-31: यह सुनकर धृतराष्ट्र ने विदुर से कहा - "आप शीघ्र ही उस पापी, लोभी दुर्योधन को उसके मित्रों, मन्त्रियों, भाइयों और अनुयायियों सहित मेरे पास ले आएँ। यदि मैं उसे पुनः सही मार्ग पर ला सकूँ, तो अच्छा होगा।" ॥30-31॥   |   mahabharat अध्याय 5.130: दुर्योधनके षड्यन्त्रका सात्यकिद्वारा भंडाफोड़, श्रीकृष्णकी सिंहगर्जना तथा धृतराष्ट्र और विदुरका दुर्योधनको पुन: समझाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 130: दुर्योधनके षड्यन्त्रका सात्यकिद्वारा भंडाफोड़, श्रीकृष्णकी सिंहगर्जना तथा धृतराष्ट्र और विदुरका दुर्योधनको पुन: समझाना  »  श्लोक 30-31
 
 
श्लोक  5.130.30-31 
एतच्छ्रुत्वा तु विदुरं धृतराष्ट्रोऽभ्यभाषत।
क्षिप्रमानय तं पापं राज्यलुब्धं सुयोधनम्॥ ३०॥
सहमित्रं सहामात्यं ससोदर्यं सहानुगम्।
शक्नुयां यदि पन्थानमवतारयितुं पुन:॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
यह सुनकर धृतराष्ट्र ने विदुर से कहा - "आप शीघ्र ही उस पापी, लोभी दुर्योधन को उसके मित्रों, मन्त्रियों, भाइयों और अनुयायियों सहित मेरे पास ले आएँ। यदि मैं उसे पुनः सही मार्ग पर ला सकूँ, तो अच्छा होगा।" ॥30-31॥
 
On hearing this, Dhritarashtra said to Vidura, "You should quickly bring that sinful, greedy Duryodhan to me along with his friends, ministers, brothers and followers. If I can bring him back on the right path, it will be good." ॥ 30-31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)