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mahabharat 5.130.26-27h: आपके पुत्र पाण्डवों का धन लेने के लिए लालायित हैं, परन्तु उन्हें अपना धन भी त्यागना होगा। यदि वे यही चाहते हैं, तो युधिष्ठिर का कार्य सिद्ध हो गया॥26 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 5.130: दुर्योधनके षड्यन्त्रका सात्यकिद्वारा भंडाफोड़, श्रीकृष्णकी सिंहगर्जना तथा धृतराष्ट्र और विदुरका दुर्योधनको पुन: समझाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.130.26-27h 
पाण्डवार्थे हि लुभ्यन्त: स्वार्थान् हास्यन्ति ते सुता:॥ २६॥
एते चेदेवमिच्छन्ति कृतकार्यो युधिष्ठिर:।
 
 
अनुवाद
आपके पुत्र पाण्डवों का धन लेने के लिए लालायित हैं, परन्तु उन्हें अपना धन भी त्यागना होगा। यदि वे यही चाहते हैं, तो युधिष्ठिर का कार्य सिद्ध हो गया॥26 1/2॥
 
‘Your sons are tempted to take the wealth of the Pandavas, but they will have to give up their own wealth as well. If this is what they want, then Yudhishthira's task is accomplished.॥ 26 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)