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mahabharat 5.130.23-25h: विदुर की यह बात सुनकर भगवान केशव ने अपने समस्त मित्रों के समक्ष राजा धृतराष्ट्र की ओर देखकर कहा, "हे राजन! यदि ये दुष्ट कौरव क्रोधित होकर मुझे बलपूर्वक बंदी बनाना चाहते हैं, तो आप उन्हें अनुमति दे दें। फिर देखें कि वे मुझे बंदी बना पाते हैं या मैं उन्हें बंदी बना लेता हूँ।"   |   mahabharat अध्याय 5.130: दुर्योधनके षड्यन्त्रका सात्यकिद्वारा भंडाफोड़, श्रीकृष्णकी सिंहगर्जना तथा धृतराष्ट्र और विदुरका दुर्योधनको पुन: समझाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.130.23-25h 
विदुरेणैवमुक्ते तु केशवो वाक्यमब्रवीत्॥ २३॥
धृतराष्ट्रमभिप्रेक्ष्य सुहृदां शृण्वतां मिथ:।
राजन्नेते यदि क्रुद्धा मां निगृह्णीयुरोजसा॥ २४॥
एते वा मामहं वैनाननुजानीहि पार्थिव।
 
 
अनुवाद
विदुर की यह बात सुनकर भगवान केशव ने अपने समस्त मित्रों के समक्ष राजा धृतराष्ट्र की ओर देखकर कहा, "हे राजन! यदि ये दुष्ट कौरव क्रोधित होकर मुझे बलपूर्वक बंदी बनाना चाहते हैं, तो आप उन्हें अनुमति दे दें। फिर देखें कि वे मुझे बंदी बना पाते हैं या मैं उन्हें बंदी बना लेता हूँ।"
 
On hearing Vidura say this, Lord Keshava looked at King Dhritarashtra in the presence of all his friends and said, 'O King! If these evil Kauravas are angry and can capture me by force, then you give them permission. Then see whether they are able to capture me or I make them captive.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)