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mahabharat 5.130.21-22h: जिस प्रकार क्रोधित सिंह हाथियों को नष्ट कर देता है, उसी प्रकार यदि भगवान श्रीकृष्ण चाहें तो क्रोध में आकर समस्त शत्रु योद्धाओं को यमलोक भेज सकते हैं।   |   mahabharat अध्याय 5.130: दुर्योधनके षड्यन्त्रका सात्यकिद्वारा भंडाफोड़, श्रीकृष्णकी सिंहगर्जना तथा धृतराष्ट्र और विदुरका दुर्योधनको पुन: समझाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 130: दुर्योधनके षड्यन्त्रका सात्यकिद्वारा भंडाफोड़, श्रीकृष्णकी सिंहगर्जना तथा धृतराष्ट्र और विदुरका दुर्योधनको पुन: समझाना  »  श्लोक 21-22h
 
 
श्लोक  5.130.21-22h 
अयमिच्छन् हि तान् सर्वान् युध्यमानाञ्जनार्दन:॥ २१॥
सिंहो नागानिव क्रुद्धो गमयेद् यमसादनम्।
 
 
अनुवाद
जिस प्रकार क्रोधित सिंह हाथियों को नष्ट कर देता है, उसी प्रकार यदि भगवान श्रीकृष्ण चाहें तो क्रोध में आकर समस्त शत्रु योद्धाओं को यमलोक भेज सकते हैं।
 
‘Just as an enraged lion destroys elephants, similarly if Lord Krishna wishes, in his anger he can send all the enemy warriors to Yamaloka.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)