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mahabharat 5.130.1: वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! अपनी माता के कहे हुए ज्ञानपूर्ण वचनों का अनादर करके दुर्योधन क्रोधपूर्वक वहाँ से उठकर उन्हीं मन्त्रियों के पास गया, जो विजयी थे।   |   mahabharat अध्याय 5.130: दुर्योधनके षड्यन्त्रका सात्यकिद्वारा भंडाफोड़, श्रीकृष्णकी सिंहगर्जना तथा धृतराष्ट्र और विदुरका दुर्योधनको पुन: समझाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  5.130.1 
वैशम्पायन उवाच
तत् तु वाक्यमनादृत्य सोऽर्थवन्मातृभाषितम्।
पुन: प्रतस्थे संरम्भात् सकाशमकृतात्मनाम्॥ १॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - जनमेजय! अपनी माता के कहे हुए ज्ञानपूर्ण वचनों का अनादर करके दुर्योधन क्रोधपूर्वक वहाँ से उठकर उन्हीं मन्त्रियों के पास गया, जो विजयी थे।
 
Vaishmpayana says - Janamejaya! Disrespecting the wise words spoken by his mother, Duryodhan got up from there in anger and went to those same ministers who were conquerors.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)