श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 13: नहुषका इन्द्राणीको कुछ कालकी अवधि देना, इन्द्रका ब्रह्महत्यासे उद्धार तथा शचीद्वारा रात्रिदेवीकी उपासना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  5.13.8 
नहुषेण विसृष्टा च निश्चक्राम तत: शुभा।
बृहस्पतिनिकेतं च सा जगाम यशस्विनी॥ ८॥
 
 
अनुवाद
नहुष से विदा लेकर शुभ एवं यशस्वी शची उस स्थान को छोड़कर बृहस्पति के महल में चली गईं।
 
After taking leave from Nahusha, the auspicious and famous Shachi left that place and went back to Brihaspati's palace.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)