Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.13.5-6: ‘अभी तक यह ज्ञात नहीं हुआ कि देवेन्द्र किस अवस्था में पड़े हैं या कहाँ चले गए हैं? प्रभु! यदि उनकी वास्तविक स्थिति का पता लगाने पर भी कुछ पता न चल सका, तो मैं आपके समक्ष उपस्थित हो जाऊँगा। मैं आपसे सत्य कहता हूँ।’ इन्द्राणी के ऐसा कहने पर नहुष अत्यन्त प्रसन्न हुए। | mahabharat अध्याय 5.13: नहुषका इन्द्राणीको कुछ कालकी अवधि देना, इन्द्रका ब्रह्महत्यासे उद्धार तथा शचीद्वारा रात्रिदेवीकी उपासना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न हि विज्ञायते शक्र: किंवा प्राप्त: क्व वा गत:।
तत्त्वमेतत् तु विज्ञाय यदि न ज्ञायते प्रभो॥ ५॥
ततोऽहं त्वामुपस्थास्ये सत्यमेतद् ब्रवीमि ते।
एवमुक्त: स इन्द्राण्या नहुष: प्रीतिमानभूत्॥ ६॥
अनुवाद
‘अभी तक यह ज्ञात नहीं हुआ कि देवेन्द्र किस अवस्था में पड़े हैं या कहाँ चले गए हैं? प्रभु! यदि उनकी वास्तविक स्थिति का पता लगाने पर भी कुछ पता न चल सका, तो मैं आपके समक्ष उपस्थित हो जाऊँगा। मैं आपसे सत्य कहता हूँ।’ इन्द्राणी के ऐसा कहने पर नहुष अत्यन्त प्रसन्न हुए।
‘It is not yet known in what condition Devendra is lying or where has he gone? Prabhu! If I cannot find out anything after finding out the exact condition, then I will present myself before you. I am telling you the truth.’ Nahush was very pleased when Indrani said this. 5-6.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥