श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 13: नहुषका इन्द्राणीको कुछ कालकी अवधि देना, इन्द्रका ब्रह्महत्यासे उद्धार तथा शचीद्वारा रात्रिदेवीकी उपासना  »  श्लोक 26-27
 
 
श्लोक  5.13.26-27 
प्रयता च निशां देवीमुपातिष्ठत तत्र सा।
पतिव्रतात्वात् सत्येन सोपश्रुतिमथाकरोत्॥ २६॥
यत्रास्ते देवराजोऽसौ तं देशं दर्शयस्व मे।
इत्याहोपश्रुतिं देवीं सत्यं सत्येन दृश्यते॥ २७॥
 
 
अनुवाद
ऐसा कहकर शचिन ने अपने मन और इन्द्रियों को वश में रखकर रात्रिदेवी की आराधना की। अपनी पतिभक्ति और सत्यनिष्ठा के कारण उसने उपश्रुति नामक रात्रिदेवी का आवाहन किया और उनसे कहा - 'देवि! मुझे वह स्थान दिखाइए जहाँ देवराज इन्द्र हैं। सत्य के द्वारा ही सत्य का दर्शन होता है।' 26-27॥
 
Saying this, Shachin kept his mind and senses under control and worshiped the goddess of the night. Due to his devotion to his husband and devotion to the truth, he invoked the night goddess named Upashruti and said to her - 'Devi! Show me the place where Devraj Indra is. Truth can be seen only through truth. 26-27॥
 
इति श्रीमहाभारते उद्योगपर्वणि सेनोद्योगपर्वणि उपश्रुतियाचने त्रयोदशोऽध्याय:॥ १३॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत उद्योगपर्वके अन्तर्गत सेनोद्योगपर्वमें उपश्रुतिसे प्रार्थनाविषयक तेरहवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १३॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)