श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 13: नहुषका इन्द्राणीको कुछ कालकी अवधि देना, इन्द्रका ब्रह्महत्यासे उद्धार तथा शचीद्वारा रात्रिदेवीकी उपासना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  5.13.21 
अकम्पन्नहुषं स्थानाद् दृष्ट्वा बलनिषूदन:।
तेजोघ्नं सर्वभूतानां वरदानाच्च दु:सहम्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
किन्तु जब बल दैत्यों का संहार करने वाले इन्द्र स्वर्ग में उसका स्थान लेने आए, तब उन्होंने देखा कि देवताओं के वरदान से नहुष अपनी दृष्टि मात्र से समस्त प्राणियों का तेज नष्ट करने में समर्थ और असह्य हो गया है। यह देखकर वे काँप उठे ॥21॥
 
But when Indra, the destroyer of the demon Bala, came to heaven to take his place, he saw that Nahush, by the boon of the gods, had become capable and unbearable of destroying the brilliance of all creatures with just his glance. Seeing this, he trembled. ॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)