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mahabharat 5.13.18: नरेश्वर! वहाँ महात्मा महेन्द्र की शुद्धि के लिए एक महान अश्वमेध यज्ञ किया गया था, जो ब्रह्महत्या का निवारण करने वाला था ॥18॥   |   mahabharat अध्याय 5.13: नहुषका इन्द्राणीको कुछ कालकी अवधि देना, इन्द्रका ब्रह्महत्यासे उद्धार तथा शचीद्वारा रात्रिदेवीकी उपासना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 13: नहुषका इन्द्राणीको कुछ कालकी अवधि देना, इन्द्रका ब्रह्महत्यासे उद्धार तथा शचीद्वारा रात्रिदेवीकी उपासना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  5.13.18 
तत्राश्वमेध: सुमहान् महेन्द्रस्य महात्मन:।
ववृते पावनार्थं वै ब्रह्महत्यापहो नृप॥ १८॥
 
 
अनुवाद
नरेश्वर! वहाँ महात्मा महेन्द्र की शुद्धि के लिए एक महान अश्वमेध यज्ञ किया गया था, जो ब्रह्महत्या का निवारण करने वाला था ॥18॥
 
Nareshwar! There a great Ashwamedha Yagya was performed for the purification of Mahatma Mahendra, which was supposed to stop Brahmahatya. 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)