श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 13: नहुषका इन्द्राणीको कुछ कालकी अवधि देना, इन्द्रका ब्रह्महत्यासे उद्धार तथा शचीद्वारा रात्रिदेवीकी उपासना  »  श्लोक 16-17
 
 
श्लोक  5.13.16-17 
श्रुत्वा विष्णो: शुभां सत्यां वाणीं ताममृतोपमाम्॥ १६॥
तत: सर्वे सुरगणा: सोपाध्याया: सहर्षिभि:।
यत्र शक्रो भयोद्विग्नस्तं देशमुपचक्रमु:॥ १७॥
 
 
अनुवाद
भगवान विष्णु की यह शुभ, सत्य और अमृतमयी वाणी सुनकर गुरु और महर्षियों सहित सभी देवता उस स्थान पर गए जहाँ भय से व्याकुल हुए इन्द्र छिपे हुए थे॥16-17॥
 
Hearing this auspicious, true and nectar-like speech of Lord Vishnu, all the gods along with the Guru and the great sages went to the place where Indra, distraught with fear, was hiding. 16-17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)