श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 13: नहुषका इन्द्राणीको कुछ कालकी अवधि देना, इन्द्रका ब्रह्महत्यासे उद्धार तथा शचीद्वारा रात्रिदेवीकी उपासना  »  श्लोक 1-2h
 
 
श्लोक  5.13.1-2h 
शल्य उवाच
अथ तामब्रवीद् दृष्ट्वा नहुषो देवराट् तदा।
त्रयाणामपि लोकानामहमिन्द्र: शुचिस्मिते॥ १॥
भजस्व मां वरारोहे पतित्वे वरवर्णिनि।
 
 
अनुवाद
शल्य कहते हैं- युधिष्ठिर! उस समय देवराज नहुष ने इन्द्राणी की ओर देखकर कहा- 'सुचिस्मिते! मैं तीनों लोकों का स्वामी इन्द्र हूँ। उत्तम रूप-रंग वाला सुन्दर रूपवान! आप मुझे अपना पति बना लें। 1 1/2॥
 
Shalya says- Yudhishthir! At that time Devraj Nahusha looked at Indrani and said – 'Suchismite! I am Indra, the lord of all three worlds. Beautiful beauty with perfect complexion! You make me your husband. 1 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)