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mahabharat 5.129.52: क्योंकि इन ज्ञानी पुरुषों की दृष्टि में यह राज्य पाण्डवों के पास हो या तुम लोगों के पास, एक ही बात है। उनके हृदय में दोनों के प्रति समान प्रेम और स्थान है तथा वे राज्य की अपेक्षा धर्म को अधिक महत्व देते हैं॥ 52॥   |   mahabharat अध्याय 5.129: धृतराष्ट्रका गान्धारीको बुलाना और उसका दुर्योधनको समझाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 129: धृतराष्ट्रका गान्धारीको बुलाना और उसका दुर्योधनको समझाना  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  5.129.52 
समं हि राज्यं प्रीतिश्च स्थानं हि विदितात्मनाम्।
पाण्डवेष्वथ युष्मासु धर्मस्त्वभ्यधिकस्तत:॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
क्योंकि इन ज्ञानी पुरुषों की दृष्टि में यह राज्य पाण्डवों के पास हो या तुम लोगों के पास, एक ही बात है। उनके हृदय में दोनों के प्रति समान प्रेम और स्थान है तथा वे राज्य की अपेक्षा धर्म को अधिक महत्व देते हैं॥ 52॥
 
‘Because in the eyes of these enlightened men, it is the same for this kingdom to be with the Pandavas or with you people. They have the same love and place for both in their hearts and they give more importance to religion than to the kingdom.॥ 52॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)