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mahabharat 5.129.49: जब भीष्म, द्रोण, कृपाचार्य, कर्ण, भीमसेन, अर्जुन और धृष्टद्युम्न - ये सभी अत्यन्त क्रोधित होकर परस्पर युद्ध करने लगते हैं, तब सम्पूर्ण प्रजा का विनाश अवश्यंभावी है ॥ 49॥   |   mahabharat अध्याय 5.129: धृतराष्ट्रका गान्धारीको बुलाना और उसका दुर्योधनको समझाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 129: धृतराष्ट्रका गान्धारीको बुलाना और उसका दुर्योधनको समझाना  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  5.129.49 
भीष्मे द्रोणे कृपे कर्णे भीमसेने धनंजये।
धृष्टद्युम्ने च संक्रुद्धे न स्यु: सर्वा: प्रजा ध्रुवम्॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
जब भीष्म, द्रोण, कृपाचार्य, कर्ण, भीमसेन, अर्जुन और धृष्टद्युम्न - ये सभी अत्यन्त क्रोधित होकर परस्पर युद्ध करने लगते हैं, तब सम्पूर्ण प्रजा का विनाश अवश्यंभावी है ॥ 49॥
 
When Bhishma, Drona, Krupacharya, Karna, Bhimasena, Arjuna and Dhrishtadyumna - all become extremely angry and fight with each other, then the destruction of the whole population is inevitable. ॥ 49॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)