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mahabharat 5.129.48: ‘कुन्तीपुत्रों का धन हड़पने का बल तुममें नहीं है। यहाँ तक कि क्रोध में स्थित सारथिपुत्र कर्ण और तुम्हारा भाई दु:शासन- ये दोनों भी ऐसा करने में असमर्थ हैं ॥ 48॥   |   mahabharat अध्याय 5.129: धृतराष्ट्रका गान्धारीको बुलाना और उसका दुर्योधनको समझाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 129: धृतराष्ट्रका गान्धारीको बुलाना और उसका दुर्योधनको समझाना  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  5.129.48 
न चैष शक्त: पार्थानां यस्त्वमर्थमभीप्ससि।
सूतपुत्रो दृढक्रोधो भ्राता दु:शासनश्च ते॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
‘कुन्तीपुत्रों का धन हड़पने का बल तुममें नहीं है। यहाँ तक कि क्रोध में स्थित सारथिपुत्र कर्ण और तुम्हारा भाई दु:शासन- ये दोनों भी ऐसा करने में असमर्थ हैं ॥ 48॥
 
‘You do not have the strength to usurp the wealth of Kunti's sons. Even the charioteer's son Karna, who is firmly in his wrath, and your brother Dushasan - both of them are incapable of doing so. ॥ 48॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)