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mahabharat 5.129.45: तात! श्रीमान्, बुद्धिमान्, बुद्धिमान् और जितेन्द्रिय पाण्डवों के साथ होने वाला संघर्ष आपको महान् सुख से वंचित कर देगा ॥45॥   |   mahabharat अध्याय 5.129: धृतराष्ट्रका गान्धारीको बुलाना और उसका दुर्योधनको समझाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 129: धृतराष्ट्रका गान्धारीको बुलाना और उसका दुर्योधनको समझाना  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  5.129.45 
श्रीमद्भिरात्मवद्भिस्तैर्बुद्धिमद्भिर्जितेन्द्रियै:।
पाण्डवैर्विग्रहस्तात भ्रंशयेन्महत: सुखात्॥ ४५॥
 
 
अनुवाद
तात! श्रीमान्, बुद्धिमान्, बुद्धिमान् और जितेन्द्रिय पाण्डवों के साथ होने वाला संघर्ष आपको महान् सुख से वंचित कर देगा ॥45॥
 
‘Tat! Sir, the conflict with the wise, intelligent and Jitendriya Pandavas will deprive you of great happiness. 45॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)