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mahabharat 5.129.38: इसलिए, बिना किसी प्रयास के महान कर्म करने वाले महाबाहु भगवान श्रीकृष्ण की शरण लो; क्योंकि यदि भगवान केशव प्रसन्न हो जाएं, तो वे दोनों पक्षों को सुखी कर सकते हैं।   |   mahabharat अध्याय 5.129: धृतराष्ट्रका गान्धारीको बुलाना और उसका दुर्योधनको समझाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 129: धृतराष्ट्रका गान्धारीको बुलाना और उसका दुर्योधनको समझाना  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  5.129.38 
प्रपद्यस्व महाबाहुं कृष्णमक्लिष्टकारिणम्।
प्रसन्नो हि सुखाय स्यादुभयोरेव केशव:॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
इसलिए, बिना किसी प्रयास के महान कर्म करने वाले महाबाहु भगवान श्रीकृष्ण की शरण लो; क्योंकि यदि भगवान केशव प्रसन्न हो जाएं, तो वे दोनों पक्षों को सुखी कर सकते हैं।
 
Therefore, take refuge in the mighty-armed Lord Shri Krishna, who does great deeds without any effort; Because if Lord Keshav is pleased, he can make both the parties happy.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)