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mahabharat 5.129.35: जो राजा काम या क्रोध के वशीभूत होकर अपने सम्बन्धियों या अन्यों के प्रति बेईमानी (छल और अन्याय) से व्यवहार करता है, उसका कोई सहायक नहीं होता ॥35॥   |   mahabharat अध्याय 5.129: धृतराष्ट्रका गान्धारीको बुलाना और उसका दुर्योधनको समझाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 129: धृतराष्ट्रका गान्धारीको बुलाना और उसका दुर्योधनको समझाना  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  5.129.35 
कामाभिभूत: क्रोधाद् वा यो मिथ्या प्रतिपद्यते।
स्वेषु चान्येषु वा तस्य न सहाया भवन्त्युत॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
जो राजा काम या क्रोध के वशीभूत होकर अपने सम्बन्धियों या अन्यों के प्रति बेईमानी (छल और अन्याय) से व्यवहार करता है, उसका कोई सहायक नहीं होता ॥35॥
 
A king who, overcome by lust or anger, behaves dishonestly (deceitfully and unjustly) towards his relatives or others, has no helper. ॥ 35॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)