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mahabharat 5.129.3: यदि वह उस दुष्टबुद्धि दुष्टात्मा को भी शांत कर सके, तो हम अपने मित्र श्रीकृष्ण की आज्ञा का पालन कर सकते हैं॥3॥   |   mahabharat अध्याय 5.129: धृतराष्ट्रका गान्धारीको बुलाना और उसका दुर्योधनको समझाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 129: धृतराष्ट्रका गान्धारीको बुलाना और उसका दुर्योधनको समझाना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  5.129.3 
यदि सापि दुरात्मानं शमयेद् दुष्टचेतसम्।
अपि कृष्णस्य सुहृदस्तिष्ठेम वचने वयम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
यदि वह उस दुष्टबुद्धि दुष्टात्मा को भी शांत कर सके, तो हम अपने मित्र श्रीकृष्ण की आज्ञा का पालन कर सकते हैं॥3॥
 
If he can also calm down that evil-minded evil soul, then we can follow the orders of our friend Shri Krishna. 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)