Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 5.129.27: जैसे अनियंत्रित घोड़े, यदि वश में न हों, तो मार्ग में मूर्ख सारथी को मार डालते हैं, वैसे ही यदि ये इन्द्रियाँ वश में न की जाएँ, तो ये मनुष्य का नाश करने के लिए पर्याप्त हैं॥ 27॥   |   mahabharat अध्याय 5.129: धृतराष्ट्रका गान्धारीको बुलाना और उसका दुर्योधनको समझाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 129: धृतराष्ट्रका गान्धारीको बुलाना और उसका दुर्योधनको समझाना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  5.129.27 
अविधेयानि हीमानि व्यापादयितुमप्यलम्।
अविधेया इवादान्ता हया: पथि कुसारथिम्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
जैसे अनियंत्रित घोड़े, यदि वश में न हों, तो मार्ग में मूर्ख सारथी को मार डालते हैं, वैसे ही यदि ये इन्द्रियाँ वश में न की जाएँ, तो ये मनुष्य का नाश करने के लिए पर्याप्त हैं॥ 27॥
 
‘Just as unruly horses, when not under control, kill a foolish charioteer on the road, similarly, if these senses are not kept under control, they are sufficient to destroy a man.॥ 27॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)