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mahabharat 5.129.22: भरतश्रेष्ठ! महामते! कोई भी अपनी इच्छा से राज्य प्राप्त नहीं कर सकता, उसकी रक्षा नहीं कर सकता, अथवा उसका उपभोग नहीं कर सकता।   |   mahabharat अध्याय 5.129: धृतराष्ट्रका गान्धारीको बुलाना और उसका दुर्योधनको समझाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 129: धृतराष्ट्रका गान्धारीको बुलाना और उसका दुर्योधनको समझाना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  5.129.22 
न हि राज्यं महाप्राज्ञ स्वेन कामेन शक्यते।
अवाप्तुं रक्षितुं वापि भोक्तुं भरतसत्तम॥ २२॥
 
 
अनुवाद
भरतश्रेष्ठ! महामते! कोई भी अपनी इच्छा से राज्य प्राप्त नहीं कर सकता, उसकी रक्षा नहीं कर सकता, अथवा उसका उपभोग नहीं कर सकता।
 
‘Bharatshrestha! Mahamate! No one can acquire, protect or enjoy the kingdom by his own will.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)