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mahabharat 5.129.21: "यदि तुम शान्त हो जाओ तो भीष्म, पितामह, मेरी तथा द्रोण आदि शुभचिन्तक मित्रों की पूजा भी तुम्हारे द्वारा सम्पन्न हो जाएगी ॥ 21॥   |   mahabharat अध्याय 5.129: धृतराष्ट्रका गान्धारीको बुलाना और उसका दुर्योधनको समझाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 129: धृतराष्ट्रका गान्धारीको बुलाना और उसका दुर्योधनको समझाना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  5.129.21 
भीष्मस्य तु पितुश्चैव मम चापचिति: कृता।
भवेद् द्रोणमुखानां च सुहृदां शाम्यता त्वया॥ २१॥
 
 
अनुवाद
"यदि तुम शान्त हो जाओ तो भीष्म, पितामह, मेरी तथा द्रोण आदि शुभचिन्तक मित्रों की पूजा भी तुम्हारे द्वारा सम्पन्न हो जाएगी ॥ 21॥
 
"If you become calm, then the worship of Bhishma, father, me and other well-wishing friends like Drona will also be completed through you. ॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)