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mahabharat 5.129.18: अपने दुष्ट पुत्र को पुनः सभा में आते देख गांधारी ने उसे डाँटा और शांति स्थापित करने के लिए इस प्रकार कहा-॥18॥   |   mahabharat अध्याय 5.129: धृतराष्ट्रका गान्धारीको बुलाना और उसका दुर्योधनको समझाना   ।   mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 5: उद्योग पर्व  »  अध्याय 129: धृतराष्ट्रका गान्धारीको बुलाना और उसका दुर्योधनको समझाना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  5.129.18 
तं प्रविष्टमभिप्रेक्ष्य पुत्रमुत्पथमास्थितम्।
विगर्हमाणा गान्धारी शमार्थं वाक्यमब्रवीत्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
अपने दुष्ट पुत्र को पुनः सभा में आते देख गांधारी ने उसे डाँटा और शांति स्थापित करने के लिए इस प्रकार कहा-॥18॥
 
Seeing her wicked son entering the assembly once again, Gandhari rebuked him and spoke thus to establish peace -॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)