Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 5.129.17: दुर्योधन की आँखें क्रोध से लाल हो रही थीं। वह अपनी माता के वचन सुनने की इच्छा से फुफकारते हुए सर्प के समान गहरी साँस लेता हुआ सभाभवन में पुनः आया॥17॥ | mahabharat अध्याय 5.129: धृतराष्ट्रका गान्धारीको बुलाना और उसका दुर्योधनको समझाना । mahabharat पर्व 5: उद्योग पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स मातुर्वचनाकाङ्क्षी प्रविवेश पुन: सभाम्।
अभिताम्रेक्षण: क्रोधान्नि:श्वसन्निव पन्नग:॥ १७॥
अनुवाद
दुर्योधन की आँखें क्रोध से लाल हो रही थीं। वह अपनी माता के वचन सुनने की इच्छा से फुफकारते हुए सर्प के समान गहरी साँस लेता हुआ सभाभवन में पुनः आया॥17॥
Duryodhan's eyes were turning red with anger. He re-entered the assembly hall, breathing deeply like a hissing snake, with the desire to hear his mother's words.॥ 17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥